तुम्हारा ख़्याल करती थी .............. कभी डूबी रहती थी .....................तुम्हारे ख्यालों में ..................और आज तुम मेरा ख़्याल रखते हो ...............एक छोटे बचे की तरह .....................मुझे समेत लेते हो ...........जब मुझे एक छींक भी आती है ....................तुम माँ की तरह हो .................प्रेम की परिभासा भी तुमसे बानी होगी ........................होंगे बहोत से लोग ...............प्रेम के प्रेमी .................मैं तो तुम्हारी दीवानी हूँ || तुम बहोत खास हो ,,....................सबसे अलग ............बहोत प्यारे ...............वो प्यारे से खिलते फूल की तरह ......... और बदलो में बने इंद्रा धनुष की तरह ........................रात की चांदनी की तरह शीतल हो ........................ मेरे रोम -रोम में बसा प्रीत तुम हो .................... मैं तुम्हारे आंगन की तुलसी उसमे पड़ने वाला मीठा जल तुम हो || प्रिया अंकित तिवारी :))