कुछ बातें तुमसे
सुनो ,,
मैंने तुम्हे कभी बताया नहीं ...............मैंने चुपके -चुपके सारी कवियाएं तुम्हारी पढ़ी है ..................या यूँ कहूं तुम्हे पढ़ने की गुस्ताख़ी की है ..................लेकिन तुम समझ में कहाँ आये ................तुम्हारा प्रेम समझ में नहीं आता ................वो तो बस ह्रदय को जीतता जा रहा है .............रोज -रोज ...............||
मैं सच कहूं ,,
मैं बहोत ही काल्पनिक लड़की हूँ ...........हर बात की कल्पना कर लेती हूँ ..............लेकिन तुम्हारी कल्पना मैंने सच में नहीं की थी ..................तुम मेरी कल्पना में समा ही नहीं सकते ..............................तुम वो ख्वाब हो जो हर लड़की .........
अपने तकिये के निचे लेके सोती है ...................और सुबह उठ कर चकाचोंध में ग़ुम जाती है.............................||
लेकिन मुझे तो तुम्हारी आँखों की चमक ने गुमा दिया ..................
इस प्रीत को क्या नाम दूँ ??............................जिसने मेरे सारे अधूरे सपनो को एक मोती में पीरों कर ............उसे प्रेम की माला में मुझे दे दिया .........
सुनो ,,
धन्यवाद रहेगा तुम्हारा .................||
तुम अगले सात जन्म के लिए मेरे हो ................||
प्रिया मिश्रा :))

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