कुछ बातें तुमसे
सुनो ,,
जब हम नहीं मिले थे ,, मैं तब भी तुम्हे जानती थी ..............बस ख़यालो में ही मिली थी तुमसे ..............तुमसे प्रेम था |
आज वो प्रेम जाने कितने बड़े कल्प वृक्ष की तरह बढ़ता जा रहा है ..................जिसकी बीज मैंने तुम्हे बिना देखे ....बिना मिले ही डाली थी |
सच तुमसे प्रेम तब भी बहोत था ...............मेरे डायरी के अनेको पन्ने में सिर्फ तुम्हारा नाम अंकित है .................जिस नाम को अंकित किया ....................वो अंकित आज मेरा है ................सोच के ही इतराती हूँ ..............
सुनो मैं ,,
फ़िल्मी हीरोइनों जैसी कोइ ..............गाना गाके या कुछ अलग सा कर के तुम्हे यकीं दिलाने का प्रयाश कभी नहीं करुँगी |
बस इतना प्रयाश रहेगा मेरा तुम हमेसा खुस रहो ......................तुम्हारी खुसी ,, मेरी जिंदगी है ||
प्रिया मिश्रा :))

Comments
Post a Comment